नमस्ते दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसा बेहतरीन दिलचस्पी विचार पर वो विचार है यूथोपिया सोसाइटी यानी कि आदर्श समाज
एक ऐसा समाज जहां ना दुख हो और ना ही गरीबी और ना ही अपराध जैसे समस्याओं का सामना करना पड़े हर तरफ बस शांति खुशी और सम्मानता हो। लेकिन क्या ऐसा समाज सच में बन सकता है? आज इसी रहस्य को खोलेंगे। तो इसमें हम भाग बाय भाग बांटे हैं। तो आप भाग बाय भाग ही समझे। तो भाग नंबर वन में है यूथोपिया सोसाइटी क्या है?
सबसे पहले बात करते हैं कि यूथोपिया सोसाइटी होती है क्या? यूथोपिया सबसे ग्रीक भाषा से आया है। यूथोपिया मतलब यूं का मतलब होता है नहीं और इथोपिया का मतलब होता है जगह। एक ऐसी जगह जो असल में मौजूद नहीं हो। लेकिन उसकी कल्पना की जा सकती है। यानी एक परफेक्ट समाज की कल्पना करना। एक ऐसा समाज होता है जहां सब बराबर हो।
किसी पर अन्याय ना हो और हर व्यक्ति सम्मानी से जीवन जी सके। अब बात करते हैं भाग नंबर टू। भाग नंबर दो में क्या कहता है? यूथोपिया सोसाइटी की मुख्य विशेषता देख लेते हैं। आदर्श समाज कैसा दिखता है? दिख एक आदर्श समाज कैसा दिखनी चाहिए? पूर्ण समानता हर व्यक्ति को समान अधिकार अवसर और सम्मान जैसे भावनाओं के साथ-साथ भेदभाव करनी चाहिए।
गरीबी का अंत हर किसी के पास निजी लाय बात करते हैं तो गरीबी का अंत हर किसी के पास जीने लायक साधन होनी चाहिए। जैसे कि भोजन कपड़ा और मकान शून्य अपराध होनी चाहिए। ना कोई चोरी करें और ना ही कोई हिंसा क्योंकि लोग नैतिकता हो और समाज सुरक्षित हो।
न्याय सबके लिए सम्मान होनी चाहिए। कानून में कोई भी भेदभाव नहीं होनी चाहिए। हर व्यक्ति का निष्पेक्ष न्याय होनी चाहिए और शिक्षा और स्वास्थ्य मुफ्त जैसे कोई स्कीम निकालना चाहिए। शिक्षा और स्वास्थ्य में मुफ्त जैसे कि गुणवत्ता वाले शिक्षा और बेहतरीन स्वास्थ्य सेवा सभी के लिए उपलब्ध होनी चाहिए।
अब बात करते हैं पॉइंट नंबर सिक्स पर्यावरण का संरक्षण। एक पर्यावरण का संरक्षण। एक स्वच्छ हरित और संतुलित पर्यावरण जहां प्राकृतिक और मनुष्य दोनों सुरक्षित हो। शांति और सहयोग की सांस्कृतिक हो। लोग एक दूसरे की मदद करें। कोई जाति धर्म भाषा के आधार पर भेदभाव ना करें। यूथोपिया सोसाइटी में व्यक्ति की भलाई से लेकर के प्राकृतिक की सुरक्षा तक सब कुछ परफेक्ट मानी जाती है।
यहां पे हुआ भाग टू एंड।
अब चलते हैं भाग थ्री पे। लोग यूथोपिया सोसाइटी की कल्पना क्यों करते हैं? मानव हमेशा से बेहतरीन दुनिया का सपना देखता आया है।
यही वजह है कि इतिहास, साहित्य और दार्शन में बार-बार यूथोपिया सोसाइटी की कल्पना की गई है। प्लेटो की रिफॉल्मिक जैसे कि गांधी जी का राम राज्य और आधुनिक सोच में आदर्श लोकतंत्र हो। सब इसी यूथोपिया विचार पर आधारित है।
यानी कि इंसान ऐसा समाज चाहता है जहां वह बिना डर बिना बिना संकट बिना जीवन चाहते हैं। अब भाग करते हैं। भाग नंबर फोर। क्या यूथोपिया सोसाइटी संभव है ऐसा? सब यह यह सबसे बड़ा सवाल है। कुछ लोग कहते हैं हां अगर मनुष्य समय, नैतिकता और सहयोग से काम करें तो समाज को बहुत हद तक आदर्श बनाया जा सकता है। लेकिन कई विद्वानों ने ऐसा भी कहा है कि नहीं हो सकता है।
क्योंकि मनुष्य की जो भावनाएं होती हैं जैसे कि ईश्वर, लालच, क्रोध, स्वास्थ्य और इच्छा से कभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ जा सकता है। इसीलिए यूथोपिया को अक्सर कल्पना की दुनिया का आदर्श मॉडल माना जाता है। यह समझने में मदद करता है कि समाज को बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। यूथोपिया सोसाइटी की महत्वपूर्ण अब देखते हैं विचार। चाहे आदर्श समाज पूरी तरह से बन पाए या ना बन पाए लेकिन इसकी कल्पना बहुत महत्वपूर्ण है। यह हमें सिखलाता है कि समाज कैसा होना चाहिए और यह अन्य हिंसा, गरीबी और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा भी देती है।
यह हमें भविष्य की कल्पना बेहतर नैतिकता और मूल्य सोचने पर मजबूर करते हैं। और सबसे बड़ा बात यह है कि हमें एक सभ्य और मानविकतावादी दुनिया की ओर ले जाती है। तो दोस्तों यह यूथोपिया सोसाइटी की पूरी कहानी थी। अगर आपको यूथोपिया सोसाइटी के बारे में पहले से मालूम नहीं था तो अगर आपको मालूम चला तो आप एक कदम इस समाज को यूथोपिया सोसाइटी की ओर ले जाएं।