भगत सिंह (Bhagat Singh) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रसिद्ध और प्रेरणादायक क्रांतिकारियों में से एक थे। उन्हें **शहीद-ए-आजम** (Shaheed-e-Azam) कहा जाता है, क्योंकि मात्र 23 वर्ष की उम्र में उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ अपनी जान कुर्बान कर दी। उनका जीवन छोटा था, लेकिन उनके विचार, साहस और बलिदान आज भी करोड़ों युवाओं को प्रेरित करते हैं। वे न केवल एक क्रांतिकारी थे, बल्कि एक गहन विचारक, नास्तिक, समाजवादी और मार्क्सवादी भी थे। आइए उनके जीवन, घटनाओं, विचारधारा और योगदान को विस्तार से समझते हैं।
### जन्म और प्रारंभिक जीवन
भगत सिंह का जन्म **27 या 28 सितंबर 1907** को पंजाब के लायलपुर जिले (अब पाकिस्तान में) के **बंगा** गांव में एक सिख जाट परिवार में हुआ था। उनके पिता **सरदार किशन सिंह संधू** और माता **विद्यावती कौर** राष्ट्रभक्त थे। उनके चाचा **अजीत सिंह** और **स्वर्ण सिंह** भी क्रांतिकारी थे और गदर पार्टी से जुड़े थे। परिवार में राष्ट्रवाद की भावना बचपन से ही थी।
बचपन में ही **13 अप्रैल 1919** को हुए **जलियांवाला बाग हत्याकांड** ने उनके मन पर गहरा असर डाला। उन्होंने खुद वहाँ जाकर खून से सनी मिट्टी उठाई और प्रतिज्ञा की कि ब्रिटिश अत्याचारों का बदला लेंगे। 1920 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में शामिल हुए और स्कूल की किताबें जला दीं। लेकिन गांधीजी के अहिंसा मार्ग से असंतुष्ट होकर वे क्रांतिकारी रास्ते पर चले।
### शिक्षा और क्रांतिकारी संगठन
भगत सिंह ने लाहौर के **दयानंद एंग्लो-वैदिक हाई स्कूल** और **नेशनल कॉलेज** से पढ़ाई की। वे **हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA)** से जुड़े, जो बाद में **हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA)** बनी। वे **चंद्रशेखर आजाद**, **राजगुरु**, **सुखदेव**, **बटुकेश्वर दत्त** जैसे साथियों के साथ थे।
उन्होंने **नौजवान भारत सभा** की स्थापना की, जो युवाओं को जागृत करने का मंच था। वे पंजाब में किसान और मजदूर आंदोलनों में सक्रिय रहे।
### प्रमुख क्रांतिकारी घटनाएँ
1. **लाला लाजपत राय की मौत का बदला (1928)**
साइमन कमीशन के विरोध में लाला लाजपत राय पर पुलिस लाठीचार्ज हुआ, जिससे उनकी मौत हो गई। भगत सिंह और साथियों ने इसका बदला लेने की योजना बनाई। **17 दिसंबर 1928** को लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक **जे.पी. सॉन्डर्स** की हत्या कर दी (उद्देश्य पुलिस सुपरिंटेंडेंट स्कॉट था, लेकिन गलती हुई)। यह **लाहौर षड्यंत्र केस** का हिस्सा बना।
2. **केंद्रीय विधान सभा में बम विस्फोट (1929)**
**8 अप्रैल 1929** को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में दो बम फेंके। बम जानबूझकर कमजोर थे – कोई मौत नहीं हुई। उद्देश्य था ब्रिटिश दमनकारी कानूनों (ट्रेड डिस्प्यूट बिल, पब्लिक सेफ्टी बिल) का विरोध और जनता को जागृत करना। उन्होंने नारे लगाए:
– **इंकलाब जिंदाबाद!**
– **साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!**
वे भागे नहीं, गिरफ्तार हो गए ताकि अदालत में अपनी बात रख सकें।
3. **जेल में भूख हड़ताल**
जेल में राजनीतिक कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार के विरोध में **भूख हड़ताल** की। यह 116 दिनों तक चली और पूरे देश में समर्थन मिला। इससे राजनीतिक कैदियों के अधिकारों पर बहस हुई।
### विचारधारा
भगत सिंह नास्तिक, समाजवादी और मार्क्सवादी थे। जेल में उन्होंने **कार्ल मार्क्स**, **लेनिन**, **एंगेल्स** पढ़े। उनकी प्रसिद्ध रचना **”मैं नास्तिक क्यों हूँ?”** (Why I Am an Atheist) में उन्होंने तर्क दिया कि ईश्वर की अवधारणा शोषण का हथियार है। वे कहते थे:
– “बम और पिस्तौल क्रांति नहीं लाते, विचारों की तलवार से क्रांति आती है।”
– स्वतंत्रता के साथ **सामाजिक-आर्थिक क्रांति** जरूरी है – पूंजीवाद और जमींदारी का अंत।
– वे **वर्ग-संघर्ष** में विश्वास करते थे और मजदूर-किसान क्रांति चाहते थे।
– धर्म को अफीम मानते थे, लेकिन किसी की आस्था पर हमला नहीं करते थे।
### फांसी और शहादत
**लाहौर षड्यंत्र केस** में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी की सजा सुनाई गई। **23 मार्च 1931** को लाहौर जेल में शाम 7:33 बजे उन्हें फांसी दी गई। वे हंसते-हंसते गए, “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगाते हुए। ब्रिटिश सरकार ने फांसी समय से पहले दी ताकि जनता विरोध न कर सके। शवों को काटकर जला दिया गया, लेकिन जनता ने उनकी शहादत को अमर कर दिया।
### योगदान और विरासत
– भगत सिंह ने युवाओं में क्रांति की चिंगारी जलाई। उनकी शहादत ने गांधीजी के अहिंसा मार्ग के साथ क्रांतिकारी रास्ते को मजबूत किया।
– **23 मार्च** को **शहीद दिवस** मनाया जाता है।
– उनकी जेल नोटबुक, पत्र और लेख आज भी पढ़े जाते हैं।
– 2026 तक भी वे युवाओं के सबसे बड़े आइकन हैं। चंडीगढ़ एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखा गया है।
– वे कहते थे: “क्रांति का मतलब सिर्फ ब्रिटिश हटाना नहीं, नया समाज बनाना है।”
भगत सिंह का जीवन संदेश है – साहस, विचार और बलिदान से कोई भी उम्र बाधा नहीं बनती। वे अमर हैं क्योंकि उन्होंने सवाल पूछे और जवाब खुद दिए। **इंकलाब जिंदाबाद!** 🚩
(शब्द संख्या: लगभग 1050)
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