**मुहम्मद अली जिन्ना: जीवन, विचारधारा और विरासत**

 

मुहम्मद अली जिन्ना (Muhammad Ali Jinnah) 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं में से एक थे। वे **पाकिस्तान के संस्थापक** (Founder of Pakistan), **कायद-ए-आजम** (Quaid-e-Azam – महान नेता) और **बाबा-ए-क़ौम** (Father of the Nation) के नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने ब्रिटिश भारत में मुस्लिमों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और अंततः **1947** में भारत के विभाजन के माध्यम से एक अलग मुस्लिम राष्ट्र **पाकिस्तान** की स्थापना की। जिन्ना का जीवन एक सफल बैरिस्टर से शुरू होकर राष्ट्र-निर्माता तक का सफर था – जिसमें उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता से लेकर **टू-नेशन थ्योरी** (दो राष्ट्र सिद्धांत) तक का सफर तय किया।

 

### जन्म और प्रारंभिक जीवन

जिन्ना का जन्म **25 दिसंबर 1876** को (कुछ स्रोतों में 20 अक्टूबर 1875) **कराची** (तब ब्रिटिश भारत, अब पाकिस्तान) में **वजीर मैनशन** में हुआ था। वे **खोजा** (Khoja) समुदाय से थे, जो हिंदू से इस्लाम में परिवर्तित हुए थे और **आगा खान** के अनुयायी थे। उनके पिता **जिन्नाहभाई पूंजा** एक सफल व्यापारी थे, और माता **मिथीबाई**। परिवार धनी था, लेकिन जिन्ना बचपन से ही स्वतंत्र विचारों वाले थे।

 

उन्होंने शुरुआती शिक्षा **सिंध मदरसतुल इस्लाम** और **क्रिश्चियन मिशनरी सोसाइटी हाई स्कूल** से कराची में ली। 16 वर्ष की उम्र में वे इंग्लैंड गए, जहाँ **लिंकन इन** (Lincoln’s Inn) से बैरिस्टर की डिग्री हासिल की। वे भारत के सबसे युवा बैरिस्टर बने (20 वर्ष की उम्र में)। 1896 में लंदन से लौटकर **बॉम्बे हाई कोर्ट** में वकालत शुरू की और जल्द ही सफल वकील बन गए। वे संवैधानिक मामलों में माहिर थे और उच्च वर्ग के मुकदमे लड़ते थे।

 

### राजनीतिक करियर की शुरुआत: हिंदू-मुस्लिम एकता के राजदूत

जिन्ना ने राजनीति की शुरुआत **इंडियन नेशनल कांग्रेस** से की। 1906 में वे कांग्रेस में शामिल हुए और **हिंदू-मुस्लिम एकता** के प्रबल समर्थक बने। 1913 में वे **ऑल इंडिया मुस्लिम लीग** में शामिल हुए, लेकिन दोनों संगठनों में सक्रिय रहे।

 

– **1916**: **लखनऊ पैक्ट** में उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता का बड़ा योगदान दिया। मुस्लिम लीग और कांग्रेस ने अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों पर सहमति बनाई।

– वे **एम्बेसडर ऑफ हिंदू-मुस्लिम यूनिटी** कहलाए।

– 1919-1920 के दौर में वे गांधीजी के असहयोग आंदोलन के समर्थक थे, लेकिन बाद में असहमत हो गए क्योंकि वे संवैधानिक तरीके से स्वतंत्रता चाहते थे, न कि अहिंसक आंदोलन से।

 

### टू-नेशन थ्योरी और पाकिस्तान की मांग

1930 के दशक में जिन्ना के विचार बदल गए। उन्होंने देखा कि कांग्रेस के नेतृत्व में मुस्लिमों को हाशिए पर रखा जा रहा है। **सर मुहम्मद इकबाल** के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने **टू-नेशन थ्योरी** (दो राष्ट्र सिद्धांत) को अपनाया।

 

– 1940 में **लाहौर रेजोल्यूशन** (पाकिस्तान रेजोल्यूशन) में मुस्लिम लीग ने अलग मुस्लिम राज्य की मांग की।

– जिन्ना ने कहा: “हिंदू और मुस्लिम दो अलग-अलग राष्ट्र हैं – अलग धर्म, संस्कृति, परंपराएँ, सामाजिक रीति-रिवाज। वे कभी एक राष्ट्र नहीं बन सकते।”

– उन्होंने मुस्लिम लीग को मजबूत संगठन बनाया और 1940 के दशक में मुस्लिमों को एकजुट किया।

 

वे कहते थे कि मुस्लिमों को हिंदू बहुमत में दबने से बचाने के लिए अलग देश जरूरी है। यह धार्मिक उत्पीड़न से ज्यादा **राजनीतिक और सामाजिक सुरक्षा** का सवाल था।

 

### विभाजन और पाकिस्तान की स्थापना

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारत छोड़ने का फैसला किया। जिन्ना ने **कैबिनेट मिशन प्लान** (1946) को अस्वीकार किया क्योंकि यह मुस्लिमों को अलग राज्य नहीं देता था। अंततः **3 जून 1947** के माउंटबेटन प्लान से भारत-पाकिस्तान विभाजन हुआ।

 

– **14 अगस्त 1947** को पाकिस्तान अस्तित्व में आया।

– जिन्ना **पाकिस्तान के पहले गवर्नर-जनरल** बने और संविधान सभा के अध्यक्ष भी।

– विभाजन के दौरान लाखों मौतें और विस्थापन हुए। जिन्ना ने शरणार्थियों के लिए कैंप बनवाए और शांति की अपील की।

 

### मृत्यु और विरासत

जिन्ना को **ट्यूबरकुलोसिस** (क्षय रोग) था। वे **11 सितंबर 1948** को कराची में मात्र 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। पाकिस्तान में उन्हें **कायद-ए-आजम** कहा जाता है। उनकी जन्मतिथि **25 दिसंबर** को **क्रिसमस** के साथ मनाई जाती है, लेकिन पाकिस्तान में यह राष्ट्रीय अवकाश है।

 

उनकी विरासत:

– पाकिस्तान का अस्तित्व उनके कारण है। वे **जॉर्ज वॉशिंगटन** की तरह पाकिस्तान के संस्थापक माने जाते हैं।

– उन्होंने मुस्लिमों को एक राष्ट्र के रूप में संगठित किया।

– आलोचक उन्हें विभाजन के लिए जिम्मेदार मानते हैं, जबकि समर्थक कहते हैं कि उन्होंने मुस्लिमों की सुरक्षा सुनिश्चित की।

– आज पाकिस्तान में उनकी छवि सम्मानित है – स्टैच्यू, एयरपोर्ट, रोड उनके नाम पर।

 

जिन्ना एक दूरदर्शी नेता थे – जो संवैधानिक तरीके से लड़ते थे, लेकिन अंत में अलग राष्ट्र की मांग पर अडिग रहे। उनका जीवन सिखाता है कि दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

 

(शब्द संख्या: लगभग 1050)

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