**आचार संहिता क्या होती है? (Model Code of Conduct – MCC)**
भारत में **आचार संहिता** या **आदर्श आचार संहिता** (Model Code of Conduct – MCC) चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों, सरकारों और प्रशासन के लिए बनाया गया एक सेट ऑफ गाइडलाइंस है। इसका मुख्य उद्देश्य है कि चुनाव **स्वतंत्र**, **निष्पक्ष** और **शांतिपूर्ण** तरीके से हों। यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी पक्ष **धनबल**, **बल**, **धर्म**, **जाति**, **भाषा** या **सरकारी मशीनरी** का दुरुपयोग न कर सके।
यह संविधान में लिखित नहीं है (अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग की शक्तियों से निकलता है), लेकिन चुनाव आयोग (ECI) इसे लागू करता है। यह एक **स्वैच्छिक सहमति** पर आधारित दस्तावेज है, जिसे राजनीतिक दल खुद मानते हैं।
### आचार संहिता कब लागू होती है?
– चुनाव आयोग जब **चुनाव कार्यक्रम** (Election Schedule) घोषित करता है, तभी MCC तुरंत लागू हो जाती है।
– लोकसभा चुनाव में पूरे देश में।
– विधानसभा चुनाव में उस राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में।
– उप-चुनाव या स्थानीय चुनाव में भी लागू होती है।
– लागू होने की तिथि से लेकर **परिणाम घोषित** होने और **नई सरकार** बनने तक (या चुनाव आयोग द्वारा समाप्त घोषित होने तक) रहती है।
– 2026 में भी किसी चुनाव की घोषणा होते ही यह लागू हो जाती है।
### आचार संहिता के मुख्य हिस्से (ECI की आधिकारिक कैटेगरी के अनुसार)
ECI ने MCC को 5 मुख्य भागों में बाँटा है:
1. **सामान्य आचरण (General Conduct)**
– कोई दल या उम्मीदवार ऐसी गतिविधि नहीं करेगा जो जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र या समुदाय के बीच नफरत फैलाए।
– धार्मिक या भावनात्मक अपील नहीं की जाएगी।
– झूठे प्रचार, व्यक्तिगत हमले या चरित्र हनन नहीं।
– महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी नहीं।
– चुनाव घोषणा-पत्र (Manifesto) में संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ कुछ नहीं होगा।
2. **प्रचार के दौरान आचरण (Conduct during Campaign)**
– रैलियाँ, जुलूस, पोस्टर, सोशल मीडिया पर नियम।
– प्रचार के लिए सरकारी संसाधन (सरकारी वाहन, हेलीकॉप्टर आदि) नहीं इस्तेमाल होंगे।
– ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन (रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर नहीं)।
– 48 घंटे पहले “साइलेंट पीरियड” – कोई प्रचार नहीं।
– सोशल मीडिया पर फेक न्यूज या गलत जानकारी नहीं फैलाई जाएगी।
3. **मतदान के दिन का आचरण (Conduct on Polling Day)**
– मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में कोई प्रचार नहीं।
– मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए कोई सामग्री (पैसे, शराब, उपहार) नहीं।
– उम्मीदवार या एजेंट मतदान केंद्र में नहीं घूमेंगे (सिर्फ एजेंट अंदर जा सकते हैं)।
– EVM/VVPAT की सुरक्षा सुनिश्चित।
4. **मतदान के बाद आचरण (Conduct after Polling)**
– परिणाम आने तक कोई विजय जश्न या हार का प्रदर्शन नहीं जो शांति भंग करे।
– हार-जीत के बाद भी सम्मानजनक व्यवहार।
5. **सरकार और प्रशासन के लिए नियम (Do’s and Don’ts for Ruling Party/Government)**
– चुनाव घोषणा से लेकर परिणाम तक **नई योजनाएँ**, **नई घोषणाएँ**, **नई नियुक्तियाँ** नहीं।
– सरकारी धन से विज्ञापन नहीं (जैसे “हमने ये किया”)।
– सरकारी मशीनरी (पुलिस, अधिकारी) का चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं।
– ट्रांसफर/पोस्टिंग पर रोक (कुछ अपवादों को छोड़कर)।
– सरकारी संपत्ति (हेलीपैड, सरकारी गेस्ट हाउस) का चुनाव प्रचार में इस्तेमाल नहीं।
### आचार संहिता का इतिहास और विकास
– पहली बार **1960** में **केरल विधानसभा चुनाव** में राज्य स्तर पर लागू हुई।
– **1962** लोकसभा चुनाव से ECI ने पूरे देश में लागू करना शुरू किया।
– **टी.एन. शेषन** (1990s) के समय में सख्ती से लागू हुई – “सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया” जैसा मजाक उड़ता था।
– **2013** में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि MCC में manifesto भी शामिल हों।
– **2024-2026** तक सोशल मीडिया, AI-जनरेटेड कंटेंट, फेक न्यूज पर नए गाइडलाइंस आए हैं।
### उल्लंघन पर क्या होता है?
– ECI चेतावनी देता है, प्रचार पर रोक लगाता है (जैसे 24-48 घंटे)।
– उम्मीदवार की डिसक्वालिफिकेशन।
– FIR दर्ज कराई जा सकती है (IPC धारा 171C, 171H आदि)।
– लेकिन MCC कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है – इसलिए ECI मुख्य रूप से **नैतिक दबाव** और **प्रतिबंध** लगाता है।
### महत्व और चुनौतियाँ
– MCC लोकतंत्र की रक्षा करता है – गरीब मतदाता को प्रभावित होने से बचाता है।
– चुनौतियाँ: सोशल मीडिया पर कंट्रोल मुश्किल, राजनीतिक नेता अक्सर उल्लंघन करते हैं, ECI पर पक्षपात के आरोप।
– फिर भी, MCC ने भारत के चुनावों को दुनिया में सबसे पारदर्शी बनाया है।
संक्षेप में, आचार संहिता चुनाव को **खेल का मैदान समान** बनाती है – जहां न पैसा, न ताकत, न धर्म का दुरुपयोग हो। यह भारत के लोकतंत्र की मजबूती का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
(शब्द संख्या: लगभग 950)
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