बिहार का इतिहास एक ऐसा गौरवशाली और विविधतापूर्ण सफर है, जो प्राचीन काल से लेकर आधुनिक समय तक भारत की सभ्यता, संस्कृति, धर्म और राजनीति का केंद्र रहा है। बिहार को “विहारों की भूमि” कहा जाता है, क्योंकि यहां बौद्ध मठों (विहारों) की प्रचुरता के कारण इसका नाम पड़ा। यह राज्य मगध, मिथिला और भोजपुर जैसे क्षेत्रों से मिलकर बना है, जहां से महान साम्राज्य उभरे, विश्व स्तर के विश्वविद्यालय स्थापित हुए और बौद्ध-जैन धर्म की नींव पड़ी। आइए, बिहार के इतिहास को विस्तार से समझते हैं—प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक काल में विभाजित करके।

 

### प्राचीन काल (2500 ई.पू. से 600 ई. तक)

 

बिहार का इतिहास प्रागैतिहासिक काल से शुरू होता है। पुरातात्विक साक्ष्यों से पता चलता है कि लगभग 2000 ई.पू. में यहां कृषि-आधारित बस्तियां थीं, जैसे **चिरांद** (सारण जिला) और अन्य स्थल। वैदिक काल में बिहार को “ब्रात्य” क्षेत्र कहा गया, जहां आर्य संस्कृति का विस्तार धीरे-धीरे हुआ।

 

सबसे महत्वपूर्ण काल **मगध साम्राज्य** का है। मगध (आधुनिक पटना, गया, नालंदा क्षेत्र) प्राचीन भारत का सबसे शक्तिशाली महाजनपद था। **बिम्बिसार** (544-493 ई.पू.) ने हर्यक वंश की नींव रखी और **पाटलिपुत्र** (आधुनिक पटना) को राजधानी बनाया। उनके पुत्र **अजातशत्रु** ने वैशाली (वज्जि गणराज्य) को जीता और किलेबंदी मजबूत की।

 

इसके बाद **मौर्य साम्राज्य** (321-185 ई.पू.) आया, जिसकी स्थापना **चंद्रगुप्त मौर्य** ने चाणक्य की मदद से की। **सम्राट अशोक** (268-232 ई.पू.) ने कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म अपनाया और अहिंसा का प्रचार किया। अशोक के शिलालेख और स्तंभ (जैसे लौरिया-नंदनगढ़) बिहार में मिले हैं। पाटलिपुत्र मौर्य साम्राज्य की राजधानी थी, जो विश्व का सबसे बड़ा शहर था।

 

मौर्यों के बाद **शुंग**, **कण्व**, **कुषाण** और **गुप्त वंश** का शासन रहा। **गुप्त काल** (320-550 ई.) को भारत का **स्वर्ण युग** कहा जाता है। **चंद्रगुप्त विक्रमादित्य** और **समुद्रगुप्त** के समय में कला, साहित्य और विज्ञान फला-फूला। **आर्यभट्ट** (नालंदा क्षेत्र) ने शून्य और खगोलशास्त्र में योगदान दिया।

 

इस काल में **नालंदा विश्वविद्यालय** (5वीं शताब्दी) और **विक्रमशिला** (8वीं शताब्दी) स्थापित हुए, जो दुनिया के सबसे पुराने और अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय थे। यहां चीन, तिब्बत, कोरिया से छात्र पढ़ने आते थे। **महावीर** (24वें जैन तीर्थंकर) और **गौतम बुद्ध** (563-483 ई.पू.) की कर्मभूमि भी बिहार थी—बोधगया में बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति, राजगीर, वैशाली, पावापुरी में उनके प्रवचन।

 

### मध्यकालीन काल (600 ई. से 1757 ई. तक)

 

मध्यकाल में बिहार पर विभिन्न राजवंशों का शासन रहा। **पाल वंश** (8वीं-12वीं शताब्दी) ने बौद्ध धर्म को संरक्षण दिया। **गोपाल** ने पाल वंश की स्थापना की। पाल काल में नालंदा और विक्रमशिला चरम पर थे। **सेन वंश** और **कर्नाट वंश** (मिथिला में) ने भी शासन किया।

 

12वीं शताब्दी में **तुर्क आक्रमण** शुरू हुए। **मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी** (1193 ई.) ने नालंदा और विक्रमशिला को नष्ट किया, जिससे बौद्ध शिक्षा का अंत हुआ। **दिल्ली सल्तनत** (तुर्क, अफगान) और फिर **मुगल साम्राज्य** का शासन रहा। **शेरशाह सूरी** (1540-1545) ने बिहार में सड़कें (ग्रैंड ट्रंक रोड), डाक व्यवस्था और रुपया सिक्का शुरू किया। उनकी राजधानी सासाराम (रोहतास) थी।

 

मुगल काल में बिहार **सूबा बिहार** बना। **औरंगजेब** के समय में स्थानीय जमींदारों का उदय हुआ। मध्यकाल में **मिथिला** की मैथिली संस्कृति और **विद्यापति** जैसे कवियों ने योगदान दिया।

 

### आधुनिक काल (1757 ई. से वर्तमान तक)

 

**प्लासी युद्ध** (1757) के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रभाव बढ़ा। बिहार बंगाल प्रेसीडेंसी का हिस्सा बना। **1770** के अकाल ने लाखों लोगों को प्रभावित किया। **संथाल विद्रोह** (1855-56) और **1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम** में बिहार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। **कुंवर सिंह** (जगदीशपुर) ने आरा में ब्रिटिशों को कड़ी टक्कर दी—वे 80 वर्ष की उम्र में भी योद्धा थे।

 

**चंपारण सत्याग्रह** (1917) भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रथम बड़ा आंदोलन था, जहां **महात्मा गांधी** ने नील किसानों के खिलाफ आवाज उठाई। **कुंवर सिंह** के बाद **राजेंद्र प्रसाद** (भारत के प्रथम राष्ट्रपति), **जयप्रकाश नारायण** (समाजवादी नेता), **रामवृक्ष बेनीपुरी** जैसे नेताओं ने योगदान दिया। **भारत छोड़ो आंदोलन** (1942) में बिहार में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं।

 

स्वतंत्रता के बाद बिहार में **1950** में राज्य बना। **2000** में **झारखंड** अलग हुआ। **नीतीश कुमार** जैसे नेताओं के शासन में विकास हुआ, लेकिन गरीबी, पलायन और बाढ़ जैसी समस्याएं बनी रहीं। आज बिहार जनसंख्या के मामले में तीसरा सबसे बड़ा राज्य है, और शिक्षा-रोजगार में प्रगति कर रहा है।

 

### निष्कर्ष

 

बिहार भारत की आत्मा है—जहां से बौद्ध-जैन धर्म निकला, जहां मौर्य-गुप्त जैसे साम्राज्य बने, जहां नालंदा ने दुनिया को ज्ञान दिया, और जहां गांधीजी ने सत्याग्रह की शुरुआत की। आज भी बोधगया, नालंदा, वैशाली, राजगीर जैसे स्थल पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते हैं। बिहार का इतिहास सिर्फ अतीत नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान का आधार है।

 

(शब्द गिनती: लगभग 1020)

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