भारत की संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन, समृद्ध और विविधतापूर्ण संस्कृतियों में से एक है। इसे “विविधता में एकता” (Unity in Diversity) के वाक्यांश से सबसे अच्छे ढंग से व्यक्त किया जाता है। यहाँ विभिन्न धर्म, भाषाएँ, परंपराएँ, भोजन, वेशभूषा, कला, संगीत और नृत्य एक साथ फलते-फूलते हैं, फिर भी एक सूत्र में बंधे रहते हैं। भारतीय संस्कृति की जड़ें लगभग 5000 वर्ष पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता से मिलती हैं और यह आज भी जीवंत एवं गतिशील बनी हुई है।

### प्राचीनता और निरंतरता
भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निरंतरता है। मिस्र, मेसोपोटामिया जैसी प्राचीन सभ्यताएँ समय के साथ विलुप्त हो गईं, लेकिन भारत की संस्कृति हजारों वर्षों से अपने मूल स्वरूप को बनाए हुए है। वेद, उपनिषद्, रामायण, महाभारत, पुराण जैसे ग्रंथ आज भी जीवन दर्शन के आधार बने हुए हैं। यहाँ “सत्यम् शिवम् सुन्दरम्” का सिद्धांत सदियों से चला आ रहा है।

### विविधता में एकता का सिद्धांत
भारत में 22 आधिकारिक भाषाएँ हैं और 19,500 से अधिक बोलियाँ बोली जाती हैं। हिंदी, बंगाली, तेलुगु, मराठी, तमिल, उर्दू, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, ओड़िया जैसी भाषाएँ अलग-अलग राज्यों की पहचान हैं। फिर भी, “अतिथि देवो भव:” (अतिथि भगवान के समान है), “वसुधैव कुटुम्बकम्” (समस्त विश्व एक परिवार है) जैसे मूल्य पूरे देश में समान रूप से स्वीकार्य हैं।

धर्मों की बात करें तो हिंदू (लगभग 80%), मुस्लिम (14%), ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, यहूदी आदि सभी साथ-साथ रहते हैं। त्योहार भी इसी विविधता को दर्शाते हैं।

### प्रमुख त्योहार
– **दीपावली** — प्रकाश का त्योहार, लक्ष्मी पूजा, पटाखे, मिठाइयाँ।
– **होली** — रंगों का त्योहार, प्रेम और उल्लास का प्रतीक।
– **ईद** — मुस्लिम समुदाय का प्रमुख त्योहार, चाँद दिखने के बाद ईदगाह में नमाज और सांझा भोजन।
– **क्रिसमस** — ईसाई समुदाय में यीशु के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
– **बैसाखी, गुरु पर्व, ओणम, पोंगल, बिहू, लोहड़ी, छठ पूजा** — ये क्षेत्रीय त्योहार कृषि, प्रकृति और श्रद्धा से जुड़े हैं।

ये सभी त्योहार सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता के अवसर भी बनते हैं। पड़ोसी एक-दूसरे के घर जाकर मिठाई बाँटते हैं, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो।

### कला और शिल्प
भारतीय कला में मूर्तिकला, चित्रकला, वास्तुकला का अनुपम योगदान है।
– **मंदिर स्थापत्य** — खजुराहो, कोणार्क, मीनाक्षी, सोमनाथ, जगन्नाथ पुरी, लिंगराज जैसे मंदिर भारतीय शिल्पकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
– **गुफा चित्रकला** — अजंता-एलोरा, बाघ गुफाएँ विश्व धरोहर हैं।
– **हस्तशिल्प** — बनारसी साड़ी, कांथा कढ़ाई, पीतल के बर्तन, ब्लू पॉटरी, मदुबनी पेंटिंग, वारली कला आज भी जीवित हैं।

### शास्त्रीय नृत्य
भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्य नाट्य शास्त्र पर आधारित हैं:

| नृत्य | राज्य/क्षेत्र | मुख्य विशेषता |
|—————-|———————|———————————–|
| भरतनाट्यम | तमिलनाडु | भक्ति और भावपूर्ण मुद्राएँ |
| कथक | उत्तर भारत | पैरों की ठुमरी, घुंघरू, कथावाचन |
| कथकली | केरल | मुखौटा, भव्य परिधान, रामायण-महाभारत |
| ओडिसी | ओडिशा | मंदिर नृत्य, त्रिभंग मुद्रा |
| कुचिपुड़ी | आंध्र प्रदेश | नृत्य-नाटक का मिश्रण |
| मणिपुरी | मणिपुर | लास्य और तांडव का सुंदर संयोजन |

ये नृत्य सिर्फ कला नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना भी हैं।

### संगीत
भारतीय संगीत दो मुख्य धाराओं में बँटा है:
– **हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत** — उत्तर भारत (खयाल, ठुमरी, दादरा, भजन)
– **कर्नाटक संगीत** — दक्षिण भारत (कृतियाँ, वर्णम)

राग-रागिनी की व्यवस्था, ताल (तीन ताल, दादरा, रूपक आदि) और स्वर (सात स्वर) पूरे देश में समान हैं। रवि शंकर, बी.एस. पुरुषोत्तम, एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी, पंडित भीमसेन जोशी जैसे महान कलाकारों ने इसे विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।

### परिवार, मूल्य और जीवन शैली
भारतीय संस्कृति में परिवार सर्वोपरि है। संयुक्त परिवार की परंपरा अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत है। बुजुर्गों का सम्मान, माता-पिता की सेवा, अतिथि सत्कार भारतीय संस्कृति के मूल आधार हैं।
– “माता-पिता गुरु देवता” का आदर्श आज भी प्रासंगिक है।
– योग, आयुर्वेद, ध्यान भारतीय संस्कृति की देन हैं जो आज विश्व स्तर पर लोकप्रिय हैं।
– अहिंसा, करुणा, सहिष्णुता जैसे मूल्य गाँधी जी ने विश्व को दिए।

### भोजन की विविधता
भारतीय भोजन क्षेत्रीय विविधता का उत्कृष्ट उदाहरण है:
– उत्तर भारत — रोटी, दाल, पनीर, बिरयानी
– दक्षिण भारत — इडली, डोसा, सांभर, रसम
– पूर्वी भारत — मछली, चावल, रसगुल्ला
– पश्चिमी भारत — ढोकला, थाली, फाफड़ा

मसालों का प्रयोग (हल्दी, जीरा, धनिया, इलायची) भारतीय व्यंजनों को विशिष्ट बनाता है।

### आधुनिक भारत और संस्कृति
आज का भारत परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम है। बॉलीवुड फिल्में, क्रिकेट, फैशन, स्टार्टअप, आईटी इंडस्ट्री ने भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर ले जाकर नई पहचान दी है। फिर भी, अधिकांश भारतीय अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहते हैं — चाहे वह शादी-विवाह की रस्में हों या धार्मिक अनुष्ठान।

### निष्कर्ष
भारतीय संस्कृति कोई स्थिर वस्तु नहीं है, यह एक जीवंत नदी की तरह है जो समय के साथ बहती रहती है, नई चीजों को ग्रहण करती है, लेकिन अपना मूल स्वाद नहीं खोती। यह सहिष्णुता, समन्वय और आध्यात्मिकता की संस्कृति है। जैसा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था — “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” भारतीय संस्कृति हमें यही संदेश देती है — विविधता को अपनाओ, एकता में रहो और निरंतर आगे बढ़ते रहो।

(शब्द संख्या ≈ 980-1020)
यह भारत की संस्कृति का संक्षिप्त लेकिन समग्र परिचय है। यदि आप किसी विशेष पहलू (जैसे कोई नृत्य, त्योहार, या क्षेत्रीय संस्कृति) पर विस्तार चाहें तो बताइए!

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