भारत का **निर्वाचन आयोग** (Election Commission of India – ECI) दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे जटिल लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया संचालित करने वाला संवैधानिक निकाय है। यह भारत की लोकतंत्र की रक्षा करता है, जिसमें 97 करोड़ से अधिक मतदाता (2024-25 के आंकड़ों के अनुसार) शामिल हैं। संविधान के **अनुच्छेद 324** के तहत स्थापित यह निकाय स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है।

 

### स्थापना और संवैधानिक आधार

– **स्थापना**: 25 जनवरी 1950 को पहला मुख्य निर्वाचन आयुक्त (Sukumar Sen) नियुक्त किया गया। 26 जनवरी 1950 से संचालन शुरू।

– **संवैधानिक प्रावधान**: अनुच्छेद 324 – संसद, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों की **सुपरिंटेंडेंस, डायरेक्शन और कंट्रोल** (पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण) निर्वाचन आयोग के पास।

– **स्वतंत्रता**: यह सरकार से स्वतंत्र है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और अन्य निर्वाचन आयुक्तों (ECs) को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की तरह हटाया जा सकता है (संसद द्वारा महाभियोग जैसी प्रक्रिया)।

– **वर्तमान संरचना (जनवरी 2026)**: तीन सदस्यीय –

– मुख्य निर्वाचन आयुक्त: **श्री ज्ञानेश कुमार** (19 फरवरी 2025 से पदभार, 1988 बैच केरल कैडर IAS)।

– निर्वाचन आयुक्त: **डॉ. सुखबीर सिंह संधू** (15 मार्च 2024 से) और **डॉ. विवेक जोशी** (19 फरवरी 2025 से)।

– **कार्यकाल**: CEC और EC का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक (जो पहले हो)।

 

### शक्तियाँ और कार्य (Powers and Functions)

निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ अनुच्छेद 324 से प्राप्त होती हैं, जो बहुत व्यापक हैं। इन्हें तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

 

1. **प्रशासनिक शक्तियाँ (Administrative Powers)**:

– मतदाता सूची तैयार करना और संशोधन (Electoral Rolls)।

– चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन (Delimitation Commission के साथ समन्वय)।

– चुनाव कार्यक्रम घोषित करना (Dates, Phases, etc.)।

– मतदान केंद्र स्थापित करना, EVM और VVPAT का प्रबंधन।

– राजनीतिक दलों का पंजीकरण और प्रतीक आवंटन।

– चुनाव खर्च की सीमा निर्धारित करना और निगरानी।

 

2. **सलाहकारी शक्तियाँ (Advisory Powers)**:

– राष्ट्रपति/राज्यपाल को सलाह देना कि कोई विधायक/सांसद अयोग्य है या नहीं (अनुच्छेद 102/191 के तहत)।

– चुनाव संबंधी विवादों पर सरकार को सलाह।

 

3. **अर्ध-न्यायिक शक्तियाँ (Quasi-Judicial Powers)**:

– राजनीतिक दलों/उम्मीदवारों पर दंड (Disqualification, Suspension)।

– मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) का उल्लंघन पर कार्रवाई।

– चुनाव याचिकाओं पर प्रारंभिक निर्णय (हालांकि अंतिम न्यायालय में)।

 

### प्रमुख कार्य और जिम्मेदारियाँ

– **लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव** संचालित करना।

– **मतदाता सूची का विशेष संशोधन (Special Intensive Revision – SIR)**: 2026 में चल रहा SIR मतदाता सूची को अपडेट करने का बड़ा अभ्यास है, जिसमें दस्तावेज़ी प्रमाण की आवश्यकता पर जोर (जन्म तिथि, स्थान, माता-पिता के दस्तावेज़ आदि)। यह विवादास्पद रहा है क्योंकि कुछ इसे अति-कठोर मानते हैं।

– **मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC)**: चुनाव घोषणा से लेकर परिणाम तक लागू। इसमें शामिल:

– राजनीतिक दलों/उम्मीदवारों का सामान्य आचरण।

– सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग न करना।

– जाति, धर्म, भाषा आधारित अपील न करना।

– चुनाव घोषणा-पत्र (Manifesto) में संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध कुछ न होना।

– 2013 से MCC में manifesto guidelines जोड़े गए (सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर)।

– **EVM और VVPAT**: 100% VVPAT सत्यापन (कुछ सीटों पर)।

– **सूचना शिक्षा और मतदाता जागरूकता**: SVEEP (Systematic Voters’ Education and Electoral Participation) कार्यक्रम।

– **डिजिटल पहल**: cVIGIL ऐप (MCC उल्लंघन रिपोर्टिंग), Voter Helpline 1950, NVSP पोर्टल।

 

### उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ

– **उपलब्धियाँ**:

– दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र संचालित करना (2019 और 2024 चुनावों में 90 करोड़+ मतदाता)।

– EVM से पारदर्शिता और तेज़ परिणाम।

– महिला मतदाता भागीदारी में वृद्धि (कई राज्यों में पुरुषों से अधिक)।

– अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान (CEC ज्ञानेश कुमार 2026 के लिए International IDEA के Council of Member States के चेयर)।

– **चुनौतियाँ**:

– MCC का सख्ती से पालन (कभी-कभी राजनीतिक दबाव)।

– फेक न्यूज, सोशल मीडिया पर गलत सूचना।

– चुनावी हिंसा और धनबल का उपयोग।

– SIR 2026 जैसे अभ्यासों पर विवाद (कुछ इसे मतदाताओं को बाहर करने का प्रयास मानते हैं)।

– CEC/EC नियुक्ति पर बहस (2023 के नए कानून के बाद भी)।

 

### महत्वपूर्ण तथ्य (2026 तक)

– मुख्यालय: निर्वाचन सदन, अशोक रोड, नई दिल्ली।

– टोल-फ्री: 1950।

– वेबसाइट: eci.gov.in (भारत में ही एक्सेसिबल)।

– हालिया फोकस: IICDEM 2026 (International Institute for Capacity Development in Electoral Management) की तैयारी, CEO सम्मेलन।

– राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commissions): पंचायत और नगर निकाय चुनावों के लिए अलग (अनुच्छेद 243K, 243ZA)।

 

### निष्कर्ष

निर्वाचन आयोग भारत के लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। यह न केवल चुनाव करवाता है, बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखता है। स्वतंत्रता, निष्पक्षता और नवाचार (जैसे डिजिटल टूल्स) के कारण यह विश्व स्तर पर मिसाल है। हालांकि चुनौतियाँ बनी हुई हैं, लेकिन ECI लगातार सुधार कर रहा है ताकि हर योग्य नागरिक का वोट मायने रखे। जैसा कि डॉ. अंबेडकर ने कहा था – “चुनाव ही लोकतंत्र की सांस है।” निर्वाचन आयोग उस सांस को स्वच्छ और मजबूत रखता है।

 

(शब्द संख्या: लगभग 1150)

यदि किसी विशेष पहलू (जैसे SIR 2026, MCC उल्लंघन के उदाहरण, या कोई चुनाव) पर अधिक विस्तार चाहिए, तो बताएं!

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