**सरदार वल्लभभाई पटेल: भारत के लौह पुरुष और एकीकरण के शिल्पकार**
सरदार वल्लभभाई पटेल, जिन्हें **लौह पुरुष** (Iron Man of India) कहा जाता है, स्वतंत्र भारत के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों में से एक थे। वे **भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री** और **गृह मंत्री** रहे, और स्वतंत्रता के बाद **562 से अधिक रियासतों** को भारतीय संघ में एकीकृत करके देश को अखंड बनाने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनका जन्म **31 अक्टूबर 1875** को गुजरात के **नाडियाद** (खेड़ा जिला) में एक साधारण पटेल (किसान) परिवार में हुआ था। पिता **झवेरभाई पटेल** और माता **लाडबा** एक मेहनती किसान परिवार से थे। वल्लभभाई चार भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। बचपन से ही वे साहसी, दृढ़ इच्छाशक्ति वाले और अनुशासित थे।
### प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
पटेल परिवार गरीब नहीं था, लेकिन साधारण था। वल्लभभाई ने स्थानीय स्कूल में पढ़ाई की और स्वाध्याय से बहुत कुछ सीखा। उन्होंने बारडोली में वकालत शुरू की, जहाँ वे सफल वकील बने। 1910 में वे **लंदन** गए और **इनर टेम्पल** से बैरिस्टर की डिग्री हासिल की। मात्र **36 महीनों** में उन्होंने परीक्षा पास की, जबकि सामान्यतः 3 वर्ष लगते थे। 1913 में वे भारत लौटे और **अहमदाबाद** में वकालत शुरू की। वे जल्द ही गुजरात के प्रमुख वकील बन गए।
### महात्मा गांधी से मुलाकात और स्वतंत्रता संग्राम
1917 में **महात्मा गांधी** से मिलने के बाद उनका जीवन बदल गया। गांधीजी के विचारों से प्रभावित होकर वे पूर्ण रूप से स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। उनका पहला बड़ा योगदान **1918 का खेड़ा सत्याग्रह** था। उस समय गुजरात में सूखा पड़ा था, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने लगान वसूला। पटेल ने किसानों का नेतृत्व किया और गांधीजी के साथ मिलकर अहिंसक सत्याग्रह चलाया। सरकार को झुकना पड़ा और लगान माफ हुआ। इस सफलता से उन्हें **सरदार** की उपाधि मिली।
**1928 का बारडोली सत्याग्रह** उनका सबसे प्रसिद्ध आंदोलन था। ब्रिटिश ने लगान 30% बढ़ा दिया। पटेल ने किसानों को संगठित किया, महिलाओं को आगे लाया और अहिंसक विरोध किया। ब्रिटिश सरकार को हार माननी पड़ी। इस आंदोलन ने उन्हें **बारडोली का सरदार** बनाया और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
वे **असहयोग आंदोलन (1920-22)**, **नमक सत्याग्रह (1930)**, **भारत छोड़ो आंदोलन (1942)** में सक्रिय रहे। कई बार जेल गए। गांधीजी के बाद वे कांग्रेस के सबसे मजबूत नेता थे। 1931 में वे कांग्रेस अध्यक्ष भी चुने गए।
### स्वतंत्रता के बाद: भारत का एकीकरण
15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, लेकिन चुनौती बड़ी थी। ब्रिटिश भारत के अलावा **565 रियासतें** (Princely States) थीं, जो स्वतंत्र रह सकती थीं या पाकिस्तान में जा सकती थीं। यदि ये अलग रहतीं, तो भारत कई टुकड़ों में बंट जाता।
**सरदार पटेल** ने **गृह मंत्री** के रूप में इस जिम्मेदारी ली। **वी.पी. मेनन** (उनके सचिव) के साथ मिलकर उन्होंने **कूटनीति, प्रेरणा और आवश्यकता पड़ने पर दबाव** से रियासतों को भारतीय संघ में शामिल किया।
– अधिकांश रियासतें (जैसे ट्रावणकोर, मैसूर, जोधपुर आदि) स्वेच्छा से शामिल हुईं।
– **जूनागढ़**: नवाब ने पाकिस्तान में जाने का फैसला किया, लेकिन जनमत संग्रह से भारत में शामिल हुआ।
– **हैदराबाद**: निजाम ने स्वतंत्र रहना चाहा। पटेल ने **पुलिस एक्शन** (ऑपरेशन पोलो, 1948) चलाकर शामिल किया।
– **कश्मीर**: महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय किया, पाकिस्तान के हमले के बाद।
केवल **3 वर्षों** में उन्होंने **562 रियासतों** को एकीकृत किया। यह विश्व इतिहास में अभूतपूर्व कार्य था। बिना बड़े युद्ध के इतने बड़े देश को एकजुट करना पटेल की दूरदर्शिता और दृढ़ता का प्रमाण है।
### अन्य योगदान
– **अखिल भारतीय सेवाएँ**: उन्होंने **IAS, IPS** जैसी अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना की, जो आज भी देश की रीढ़ हैं।
– **संविधान निर्माण**: वे संविधान सभा में सक्रिय थे और मौलिक अधिकारों, संघीय ढांचे पर प्रभाव डाला।
– **राष्ट्रीय एकता**: उन्होंने सांप्रदायिक दंगों को नियंत्रित किया, विशेषकर विभाजन के समय।
– वे **प्रथम उप-प्रधानमंत्री** थे और नेहरू के साथ मिलकर देश चलाया।
### व्यक्तिगत जीवन और मृत्यु
पटेल का जीवन सादगीपूर्ण था। उनकी पत्नी **झावेरबाई** का 1909 में निधन हो गया। दो संतानें: **मनिबेन पटेल** (स्वतंत्रता सेनानी) और **दह्याभाई पटेल**। वे सख्त लेकिन दयालु थे।
**15 दिसंबर 1950** को मुंबई में हृदयाघात से उनका निधन हुआ। उनकी अंतिम इच्छा पर **अहमदाबाद** में **साबरमती आश्रम** के पास अंतिम संस्कार हुआ।
### विरासत
– **31 अक्टूबर** को **राष्ट्रीय एकता दिवस** (Rashtriya Ekta Diwas) मनाया जाता है।
– **स्टैच्यू ऑफ यूनिटी** (गुजरात में 182 मीटर की प्रतिमा) दुनिया की सबसे ऊँची मूर्ति है।
– पटेल ने कहा था: “भारत की एकता ही उसकी शक्ति है।”
सरदार पटेल ने एक बिखरे हुए भारत को एक मजबूत राष्ट्र बनाया। वे **अखंड भारत** के निर्माता थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि दृढ़ संकल्प और नेतृत्व से असंभव भी संभव हो जाता है। आज भी वे **एकता के प्रतीक** हैं।
(शब्द संख्या: लगभग 1050)
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